एक ख़ास अहसाह नज़र आता है, आपकी आँखो मे,
बस आपका ही इंतज़ार रहता है, हमारी आँखो मे !
तुम्हारा पर्तिबिम्ब नज़र आता है, देखो मेरी आँखो मे,
सारी खूबसूरती आप से है, बस, ठहर जाओ, मेरी आँखो मे !
एक अनदेखा सा, अहसास दिखता है, जब देखु आपकी आँखो मे,
आप मान मुझे जो इतना दे रहे हो, दिखाई देता है आपकी आँखो मे !
___कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)___
बस आपका ही इंतज़ार रहता है, हमारी आँखो मे !
तुम्हारा पर्तिबिम्ब नज़र आता है, देखो मेरी आँखो मे,
सारी खूबसूरती आप से है, बस, ठहर जाओ, मेरी आँखो मे !
एक अनदेखा सा, अहसास दिखता है, जब देखु आपकी आँखो मे,
आप मान मुझे जो इतना दे रहे हो, दिखाई देता है आपकी आँखो मे !
___कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)___
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