Sunday, September 18, 2011

!! मृदु संगीत-स्वर् और सौन्दर्य का एक साथ संगम !!




मृदुला अधर से स्वर निकला तो, अचानक से अधीर हो गया था...
बजाया जब तूने साज़, संगीत मे विभोर हो गया था....
तेरे आकर्षक नैनन मे मदहोश हो कर डूब गया था...
तेरे मनमोहक मुख को निहार कर मंत्रमुग्ध हो गया था..
तेरे लुभावने अधर को देख कर, तेरे गीत मे कही विलुप्त हो गया था...
तेरे नैनो जब देखा मेरे नेत्रो मे, हृदय मे आकर्षकता का अहसास हो गया था....
स्मित अधर ने जब गया अपना गीत, सुनकर स्थिर हो गया था...
सुनकर तेरा मधुर, मनमोहक, मादक गीत-संगीत, सम्मोहन मे चला गया था....
रेशम के से तेरे केश, गीत-संगीत से शर्मा कर बिखर गये थे....
स्मित मुख से निकला एक-एक मिष्ठ स्वर, भावबोधक हो गया था....
साज़ ढकने का वस्त्र भी, नृत्या की मुद्रा मे पहुँच गया था....
हृदय मे तुझे आलिंगन करने का संकोच भरा अहसाह आ गया था....
ये छोटा सा समय, मानो मेरे जीवन का सबसे अनमोल हो गया था...
आकर्षणशीलता, मनमोहकता, मनोहरता, सुहावनापन सब कुछ महसूस किया था....
तू मेरे जीवन का सबसे मधुर अहसास है,
तभी तूने मृदुला मादक स्वर, आकर्षक अधर, मनमोहक योवन पाया है ,
संगीत-स्वर् और सौन्दर्य का एक साथ संगम, प्रथम बार पाया है !!!!!!!!
___दीपक पांचाल___

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