Wednesday, September 21, 2011

!! रात, मैं तुम्हारे साथ था !!


रात भर, मैं सो ना पाया,
महसूस करता रहा,
तुम्हारी खूबसूरत, मनभावन, निर्मल काया !
तुम पास थी मेरे, 
कभी तुम मुस्कराती,
कभी तुम अपनी आँखें दिखती !
कभी तुम मुझसे बातें करती,
तो कभी, अचानक से, मेरे बालो को सहलाती!
कभी तुम मुझे छेड़ती,
तो कभी, अपनी अदा की छटा बिखेरती!
कभी तुम, अपने पैरो से, मेरे पैरो पे गुदगुदी करती,
तो कभी, अचानक से, अपने बालो से मेरा चेहरा ढक देती !
तुम मेरे कंधे पर, अपने आप को गिरा,
तो कभी, मेरे गले मे, अपनी बाहें डाल, झूल जाती! 
कभी तुम, अपनी अंगड़ाई से, मुझे पास बुलाती,
तो कभी, मुस्करा कर, मुझसे दूर भाग जाती!
कभी तुम, मेरे सीने पे अपना सिर रखती,
तो कभी, मेरे सीने पे अपने, अधर रख देती !
कभी, मेरी आँखो मे, अपनी आँखो डाल, देखती,
ती कभी, तुम्हारी पलके, कोमलता से शरमा जाती !
कभी तुम, मुझे अपने मदहोश आलिंगन मे बाँध लेती,
तो कभी, अपने मीठे अधरो का रस, मेरे होंठो मे भर देती!
कभी तुम, मेरी करवट के साथ, अपनी करवट लेती,
तो कभी, मेरा सिर पकड़, अपने आँचल पे रख देती !


तुम्हारा एक एक अंदाज, मुझमे चेतना भर रहा है,
सुबह हो चली है___ आज रात जल्दी ख़त्म हो गयी!
मैं उठने को हूँ, 
अचानक से तुमने मेरा हाथ पकड़ा, 
तुम्हारे मुख से निकला, रुक जाओ ना,
अभी तो आए थे, अभी चल दिए !


__दीपक पांचाल___

















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