ना तू हाँ करती है,
ना तू ना करती है!
तुझे ना समझ पाया कभी,
तू ये क्यो करती हैं!
उलझा हूँ, तेरी अदओ मे,
तू ऐसा क्या करती है!
कसक है तेरी, हर हरकत मे,
तू हमेशा, ऐसा ही करती है!
शबनम टपकती, तेरी, हर मुस्कान पे,
तू ये जानबूझकरम ऐसा करती है!
देख कर मुझे, अंगड़ाई लेती है,
मुझे देखकर ही तू, ये सब करती है!
तडपा कर रख दिया, तूने मुझे,
सच-सच बता, क्या तू, मुझसे प्यार करती है!!
ना तू, इकरार करती है,
ना तू इनकार ही करती है !!
____कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)___
ना तू ना करती है!
तुझे ना समझ पाया कभी,
तू ये क्यो करती हैं!
उलझा हूँ, तेरी अदओ मे,
तू ऐसा क्या करती है!
कसक है तेरी, हर हरकत मे,
तू हमेशा, ऐसा ही करती है!
शबनम टपकती, तेरी, हर मुस्कान पे,
तू ये जानबूझकरम ऐसा करती है!
देख कर मुझे, अंगड़ाई लेती है,
मुझे देखकर ही तू, ये सब करती है!
तडपा कर रख दिया, तूने मुझे,
सच-सच बता, क्या तू, मुझसे प्यार करती है!!
ना तू, इकरार करती है,
ना तू इनकार ही करती है !!
____कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)___
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