Thursday, December 29, 2011

!! सजनवा की याद !!

सजी साँवरिया, ओढ़े चुनरिया,
अँखियन मे कजरा डाले,
हाथन मे कंगना डाले,
पैरन मे, पायलिया डाले,
दहलीज़ पे नज़रिया डाले,

बैठी है,
सजनवा की बाट देखे है,
नैनन मे अपने सपने देखे है,
मुखमंडल पे मुस्कान देखे है,
बस पिया मिलन की राह देखे है,

कितने साल निकल गये,
कितने मौसम चले गये,

अब के सावन, सतरंगी कर दे,

अब की बार, मुझे हारियली कर दे,

अब की बार आजा, सजनवा,
बस अब की बार, बस अब की बार !


__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__

Saturday, December 17, 2011

!! दर्द मे शायरी !!

हम अगर दर्द मे भी, कुछ कहते हैं,

उनको हर दर्द मे शायरी नज़र आती है,

हम दर्द से करहाते हैं,

वो खड़े हो कर तालिया बजाते हैं,

अपना दर्द किस से कहें,

जिसको भी सुनते हैं,

वही, वाह.. वाह... बहुत खूब कह कर,

बस आगे निकल जाते है___

__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__