हम अगर दर्द मे भी, कुछ कहते हैं,
उनको हर दर्द मे शायरी नज़र आती है,
हम दर्द से करहाते हैं,
वो खड़े हो कर तालिया बजाते हैं,
अपना दर्द किस से कहें,
जिसको भी सुनते हैं,
वही, वाह.. वाह... बहुत खूब कह कर,
बस आगे निकल जाते है___
__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__
उनको हर दर्द मे शायरी नज़र आती है,
हम दर्द से करहाते हैं,
वो खड़े हो कर तालिया बजाते हैं,
अपना दर्द किस से कहें,
जिसको भी सुनते हैं,
वही, वाह.. वाह... बहुत खूब कह कर,
बस आगे निकल जाते है___
__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__
bohot khub...
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