सजी साँवरिया, ओढ़े चुनरिया,
अँखियन मे कजरा डाले,
हाथन मे कंगना डाले,
पैरन मे, पायलिया डाले,
दहलीज़ पे नज़रिया डाले,
बैठी है,
सजनवा की बाट देखे है,
नैनन मे अपने सपने देखे है,
मुखमंडल पे मुस्कान देखे है,
बस पिया मिलन की राह देखे है,
कितने साल निकल गये,
कितने मौसम चले गये,
अब के सावन, सतरंगी कर दे,
अँखियन मे कजरा डाले,
हाथन मे कंगना डाले,
पैरन मे, पायलिया डाले,
दहलीज़ पे नज़रिया डाले,
बैठी है,
सजनवा की बाट देखे है,
नैनन मे अपने सपने देखे है,
मुखमंडल पे मुस्कान देखे है,
बस पिया मिलन की राह देखे है,
कितने साल निकल गये,
कितने मौसम चले गये,
अब के सावन, सतरंगी कर दे,
अब की बार, मुझे हारियली कर दे,
अब की बार आजा, सजनवा,
बस अब की बार, बस अब की बार !
__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__
बस अब की बार, बस अब की बार !
__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__

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