Sunday, January 1, 2012

!! प्यार ही प्यार !!

मह्न्दी से सजे हाथ..
जैसे ये हाथ हमे बुला रहे हैं...
जैसे कोई अपना आवाज़ दे रहा है...
जैसे इन हाथो मे हमारा हाथ थामा है..
हम आपके पहलू मे आकर खुश हैं..


ले के चलो मुझे ऐसे जगह तुम,
हाथो मे थाम लो हाथ मेरा तुम,
हर कदम पे हो साथ, बस तुम,
नज़र आए जहा पे,बस तुम ही तुम,


तन्हाइयो से दूर, भीड़ से दूर,


अपनेपन से सजी महफ़िल हो,
जहाँ बस प्यार ही प्यार हो,
गुलाब से सजी रंगीन दुनिया हो,
फ़िज़ाओं मे फैली खुश्बू हो,
हवओ मे घुली मीठी बातें हों !


__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__


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