जिस से भी मिलो,
गले लगा कर मिलो,
पता नही कब,
भगवान मिल जाए,
हम तो जिससे मिलते है,
बस प्यार से मिलते है,
प्यार की तलाश मे,
दिन रात घूमते है,
कभी भीड़ मे घूमते हैं,
कभी मेले मे घूमते हैं,
प्यार की तलाश में,
जाने कहाँ कहाँ घूमते हैं,
गले लगा कर मिलो,
पता नही कब,
भगवान मिल जाए,
हम तो जिससे मिलते है,
बस प्यार से मिलते है,
प्यार की तलाश मे,
दिन रात घूमते है,
कभी भीड़ मे घूमते हैं,
कभी मेले मे घूमते हैं,
प्यार की तलाश में,
जाने कहाँ कहाँ घूमते हैं,
कोई जोगी कहता है,
कोई लुटेरा कहता हैं,
ये तो सामने वाला जानता हैं,
हम तो बस प्यार लुटाने आते हैं
जोगी बन कर चले जाते हैं...
हम तो बस,
चिरागो मे रोशिनी की लौ जलाते हैं,
इसलिए तो, इसलिए तो,
हम अपनेपन की निशानी ढूँढते हैं,
जहा मिल जाए अपनो का साथ,
वही अपना डेरा डाल लेते है,
अपने पन की रात गुज़ार लेते हैं,
प्यार की तलाश मे, दिन रात घूमते है !
__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__
कोई लुटेरा कहता हैं,
ये तो सामने वाला जानता हैं,
हम तो बस प्यार लुटाने आते हैं
जोगी बन कर चले जाते हैं...
हम तो बस,
चिरागो मे रोशिनी की लौ जलाते हैं,
इसलिए तो, इसलिए तो,
हम अपनेपन की निशानी ढूँढते हैं,
जहा मिल जाए अपनो का साथ,
वही अपना डेरा डाल लेते है,
अपने पन की रात गुज़ार लेते हैं,
प्यार की तलाश मे, दिन रात घूमते है !
__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__

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