Tuesday, November 15, 2011

!! तू मेरी आँखो का नूर है !!

तू मेरी आँखो का नूर है,
तू ही मेरे दिल का सकून है,
देखता हूँ जब आईने मे,
सामने तू खड़ी होती है,
जैसे मेरे पास मेरे करीब,
आने के लिए तू,
ये आईना अभी तोड़ देगी...

__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__

!! वक़्त ने डूबा दिया मुझको !!

वक़्त ने डूबा दिया मुझको,

कोई मंज़र, कोई सैलाब,

जैसे बहा ले गया मुझको,

अपने नज़र ना आए, कहीं,

हर नज़र डरा गयी मुझको,

हर किसी ने रुसवा किया,

हर किसी ने ठोकर मारी मुझको,

देखते रहो वो, खड़े खड़े,

बस रुलाके के चल दिए वो मुझको,

अपना कोई वज़ूद ना रहा,

बस यूही, वक़्त रुलाता रहा मुझको !


__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__

Thursday, November 10, 2011

!! तमन्ना चाह से है, मंजिले होसलो से है !!

तमन्ना चाह से है, मंजिले होसलो से है,

चाह और बुलंद होसला, ये बस हम से है,

रास्ता हम बनाएँगे आपका, बस साथ तुम से है,

हाथ थाम के चलो, सफ़र एक दूसरे से है,

अंजान राह सुहानी बनेगी,

बस एक कदम तुम से, तो अगला कदम हम से है,


__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__

!! तुझे हर वक़्त साथ अपने पता हूँ !!

तुझे हर वक़्त साथ अपने पता हूँ,

तेरी हर एक बात तो साथ लिए जाता हूँ,

तू यहीं पास है मेरे, जैसे तुझसे बातें किए जाता हूँ,

तेरे नयनो मे, बस मदहोश हुए मैं जाता हूँ !

बिखराकर का जोड़ना आता है हमे,

जब जब तेरे होटो को अपने हाथो से छूता हूँ,

सीहर सिहर तुम जाती हो,

तुम्हारी हर धकान मे,

अपने लिए एक अपनापन पता हूँ !____


__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__

Tuesday, November 8, 2011

!! हम आपकी परछाईयो मे भी खूबसूरत अहसास भर देंगे !!

नायक: पीछे पीछे चलूँगा, आप सोच लेना.
            अकेली चल रही हूँ,
            मैं सोचूँगा आप बस 2 कदम आगे हो,
            कम से कम साथ तो चल रहा हूँ आपके,
            आप आगे हो या साथ मे, क्या फ़र्क पड़ता है,

नायिका: हमे तो अपनी ही परच्छाई से भी डर लगता है ...

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नायक :
हम आपकी परछाईयो मे भी खूबसूरत अहसास भर देंगे,

आपके..हर एक..एक..कदम पे..मादक..और..लुभावना..प्यार भर देंगे,

डूब जाओगी..इन अहसाहो मे,
आपके..हर अंग मे नशा ऐसा भर देंगे,

आपके रसीले होटो से टपकती शबनम की कसम,
आपके...होटो मे अपने अधरो का रस हम भर देंगे,

आपकी हर अंगड़ाई, हर परछाई मे हम,
अपनी बेकरारी ओर चाहत भर देंगे,

सो ना पाओगे, रात भर, हमारे बिना..
ऐसी आदत तुम्हारे अंदर भर देंगे,

आपके कोमल मरम्स्पर्शि गालो पे...
हम अपने होने की निशानी भर देंगे,

डूब जाओगे.. हमारी आँखो मे,
आपको नैनो मे मादक नशा हम भर देंगे,

हमारी एक एक छुवन से, पलके आपकी झुक जाएँगी,
ऐसी प्यार भरी पिचकारी, हम आपके अंदर भर देंगे,

खो ना जाना मेरी बातों मे,
आपको अपनी बाहों मे भर लेंगे,

____कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)____




Friday, November 4, 2011

!! तेरे नैनो मे रम गये मेरे नैन हैं !!

तेरे नैनो मे रम गये मेरे नैन हैं,
मानो यही ठहर से गये मेरे नैन है,

खो गया हूँ मैं पूरी तरह से,
मेरे सामने आपके नैन हैं,

मेरा अक्स नज़र आता है,
दर्पण बन गये आपके नैन हैं,

नैनो की बात नैनो से होने लगी,
बड़े ही मनभावन आपके नैन हैं,

अपने अधर से छूकर देखता हूँ,
बड़े ही नशीले आपके नैन है,

पलके उठती आपकी तो, नशा छा जाता,
मदिरा से भरे, मदहोश आपके नैन है,

आपका पूरा योवन महकता है,
इतने खूबसूरत, लुभावने आपके नैन है,

मेरे होटो पे मुस्कान, दिल मे अरमान है,
क्यो की मेरे सामने आपके, हसीन नैन हैं,

आपकी नज़रो की क्या बात,
बड़े की कातिल आकर्षित से आपके नैन है,

घायल भी आपके नैनो ने किया मुझे,
और अब उपचार भी आपके सुन्दर नैने हैं,

आप कुछ ना कहो, बस खो जाने दो मुझे,
मेरे सामने आपके नैन है.....

___कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)___