Friday, November 4, 2011

!! तेरे नैनो मे रम गये मेरे नैन हैं !!

तेरे नैनो मे रम गये मेरे नैन हैं,
मानो यही ठहर से गये मेरे नैन है,

खो गया हूँ मैं पूरी तरह से,
मेरे सामने आपके नैन हैं,

मेरा अक्स नज़र आता है,
दर्पण बन गये आपके नैन हैं,

नैनो की बात नैनो से होने लगी,
बड़े ही मनभावन आपके नैन हैं,

अपने अधर से छूकर देखता हूँ,
बड़े ही नशीले आपके नैन है,

पलके उठती आपकी तो, नशा छा जाता,
मदिरा से भरे, मदहोश आपके नैन है,

आपका पूरा योवन महकता है,
इतने खूबसूरत, लुभावने आपके नैन है,

मेरे होटो पे मुस्कान, दिल मे अरमान है,
क्यो की मेरे सामने आपके, हसीन नैन हैं,

आपकी नज़रो की क्या बात,
बड़े की कातिल आकर्षित से आपके नैन है,

घायल भी आपके नैनो ने किया मुझे,
और अब उपचार भी आपके सुन्दर नैने हैं,

आप कुछ ना कहो, बस खो जाने दो मुझे,
मेरे सामने आपके नैन है.....

___कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)___


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