Tuesday, November 15, 2011

!! तू मेरी आँखो का नूर है !!

तू मेरी आँखो का नूर है,
तू ही मेरे दिल का सकून है,
देखता हूँ जब आईने मे,
सामने तू खड़ी होती है,
जैसे मेरे पास मेरे करीब,
आने के लिए तू,
ये आईना अभी तोड़ देगी...

__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__

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