तमन्ना चाह से है, मंजिले होसलो से है,
चाह और बुलंद होसला, ये बस हम से है,
रास्ता हम बनाएँगे आपका, बस साथ तुम से है,
हाथ थाम के चलो, सफ़र एक दूसरे से है,
अंजान राह सुहानी बनेगी,
बस एक कदम तुम से, तो अगला कदम हम से है,
__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__
चाह और बुलंद होसला, ये बस हम से है,
रास्ता हम बनाएँगे आपका, बस साथ तुम से है,
हाथ थाम के चलो, सफ़र एक दूसरे से है,
अंजान राह सुहानी बनेगी,
बस एक कदम तुम से, तो अगला कदम हम से है,
__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__
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