Friday, February 10, 2012

!! मुलाक़ात !!

मुद्दत हो गयी,
बात ना उनसे हुई,
हम तो,
कल भी यहीं थे,
आज भी,
खड़े है यहीं,
बस आस लगाएँ,
शायद आज,
उनसे रूबरू हो जाएँ,
उनसे मुहब्बत भरी,
दो-चार गुफ्तगू हो जाए!!
_© कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)_

Tuesday, February 7, 2012

!! ये नशा क्यूँ...अभी से !!

ये नशा क्यूँ...अभी से,
अभी तो, रात मेरी बाकी हैं,



ये सिरहन क्यूँ..अभी से,
अभी तो, आग मेरी बाकी हैं,



ये सिमटन क्यूँ..अभी से,
अभी तो, आना मेरा बाकी है,

 ये हलचल क्यूँ.. अभी से,
अभी तो, छुवन मेरी बाकी हैं,


 ये शर्माहट क्यूँ.. अभी से,
अभी तो देखना, तुझे बाकी हैं.


 ये प्यास क्यूँ, अभी से,
अभी तो, अधर रस पीना बाकी हैं,


 ये बिस्तर पे सलवट क्यूँ.. अभी से,
अभी तो खेलना मेरा बाकी है,


 ये अहसाहो भरी तड़पन क्यूँ..अभी से,
अभी तो, प्यार मेरा बाकी है,


यूँ खो ना जाना, ख्यालो मे,

अभी तो, सारी बात मेरी बाकी है!!


_कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)_

Saturday, February 4, 2012

!! प्यारा मिलन !!

पूरी रात खेलता रहा ज़ुल्फो से तेरी,
टपकती शबनम का घूँट भरता रहा,


आलिंगन मे कैसा जकड़ा तूने,
मदहोश हो कर प्यार तुझे करता रहा,


अपनी हर करवट के साथ तू थी मेरे,
ले कर तुझे बाहों मे,
करवटें पे करवटें मैं अपनी बदलता रहा,


नैने मे देख नशा तेरी,
तेरे अधरो का मादक ज़ाम मैं पिता रहा,
मौम की सी हो गयी थी तू,
पूरी रात, अपनी गर्मी से पिंग्लाता रहा,


सिहर सी गयी थी तू,
सिमट सी गये थी तू,
मेरे प्यार का रस पाकर,
और भी मीठी हो गयी थी तू,


ये रात.....
ना जाने कब ख़तम हो गयी,
मेरे हाथ थाम के मुझसे कहा,
यार ये कमखत, दिन क्यूँ निकल आया!!


__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__









Friday, February 3, 2012

!! काश मैं आईना होता !!

काश मैं आईना होता,
सौ टुकड़े के बाद भी,
मेरे हर टुकड़े पे,
तेरा ही अक्स नज़र आता,

मेरा हर छोटा सा कतरा भी,
बयाँ करता मेरी हक़ीकत,

जितना तुम  मुझे तोड़ते,
मेरे अंग तुझे देखना ना छोड़ते,

गर छू लेती मेरे टुकड़े को तू,
देता जाता, अपने होने की निशानी तुझे,


पीस जाता गर मैं तो,
चमकता तेरी आँखो मे,
पलके झुक जाती तेरी,
देख चमक मेरी दीवानगी की,

टूटता जाता बिखरता जाता,
बार बार तुझसे ये कहता जाता,

के तू है अब भी मेरी आखों मे,
के है तू अब भी मेरी सांसो मे!!



__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__



Thursday, February 2, 2012

!! क्या खूब लिखती हो !!

क्या खूब लिखती हो,
क्या अदब लिखती हो,
जब भी लिखती हो,
लाजवाब लिखती हो,

कभी प्यार लिखती हो,
कभी अहसास लिखती हो,

तुम हर बार...
मेरे दिल की..हर बात लिखती हो,
तुम एक नया अंदाज़ लिखती हो,
जशन ए बहार लिखती हो,

तुम कभी तकरार लिखती हो,
कभी हमारा करार लिखती हो,
तुम फुलो का रंग लिखती हो,
कभी ऑश की ठंडक लिखती हो,

तुम मिलन लिखती हो,
तुम सिरहन लिखती हो,
कभी कभी__

तुम अपने होटो की प्यास लिखती हो,
लिखती हो तो केवल, नशा लिखती हो,
तुम हर बार सारी कायनात्त लिखती हो,
अपने मिलन की हर बात तुम लिखती हो,
तुम्हारी हर बात मे बात है,
लिखने के अंदाज़ मे एक बात है,
इसलिए तो...

क्या खूब लिखती हो,
क्या अदब लिखती हो,
जब भी लिखती हो,
लाजवाब लिखती हो!!

__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__

© Copy Right ║█║│█║█║█║║█║█║║



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