Saturday, February 4, 2012

!! प्यारा मिलन !!

पूरी रात खेलता रहा ज़ुल्फो से तेरी,
टपकती शबनम का घूँट भरता रहा,


आलिंगन मे कैसा जकड़ा तूने,
मदहोश हो कर प्यार तुझे करता रहा,


अपनी हर करवट के साथ तू थी मेरे,
ले कर तुझे बाहों मे,
करवटें पे करवटें मैं अपनी बदलता रहा,


नैने मे देख नशा तेरी,
तेरे अधरो का मादक ज़ाम मैं पिता रहा,
मौम की सी हो गयी थी तू,
पूरी रात, अपनी गर्मी से पिंग्लाता रहा,


सिहर सी गयी थी तू,
सिमट सी गये थी तू,
मेरे प्यार का रस पाकर,
और भी मीठी हो गयी थी तू,


ये रात.....
ना जाने कब ख़तम हो गयी,
मेरे हाथ थाम के मुझसे कहा,
यार ये कमखत, दिन क्यूँ निकल आया!!


__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__









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