Tuesday, February 7, 2012

!! ये नशा क्यूँ...अभी से !!

ये नशा क्यूँ...अभी से,
अभी तो, रात मेरी बाकी हैं,



ये सिरहन क्यूँ..अभी से,
अभी तो, आग मेरी बाकी हैं,



ये सिमटन क्यूँ..अभी से,
अभी तो, आना मेरा बाकी है,

 ये हलचल क्यूँ.. अभी से,
अभी तो, छुवन मेरी बाकी हैं,


 ये शर्माहट क्यूँ.. अभी से,
अभी तो देखना, तुझे बाकी हैं.


 ये प्यास क्यूँ, अभी से,
अभी तो, अधर रस पीना बाकी हैं,


 ये बिस्तर पे सलवट क्यूँ.. अभी से,
अभी तो खेलना मेरा बाकी है,


 ये अहसाहो भरी तड़पन क्यूँ..अभी से,
अभी तो, प्यार मेरा बाकी है,


यूँ खो ना जाना, ख्यालो मे,

अभी तो, सारी बात मेरी बाकी है!!


_कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)_

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