Friday, February 3, 2012

!! काश मैं आईना होता !!

काश मैं आईना होता,
सौ टुकड़े के बाद भी,
मेरे हर टुकड़े पे,
तेरा ही अक्स नज़र आता,

मेरा हर छोटा सा कतरा भी,
बयाँ करता मेरी हक़ीकत,

जितना तुम  मुझे तोड़ते,
मेरे अंग तुझे देखना ना छोड़ते,

गर छू लेती मेरे टुकड़े को तू,
देता जाता, अपने होने की निशानी तुझे,


पीस जाता गर मैं तो,
चमकता तेरी आँखो मे,
पलके झुक जाती तेरी,
देख चमक मेरी दीवानगी की,

टूटता जाता बिखरता जाता,
बार बार तुझसे ये कहता जाता,

के तू है अब भी मेरी आखों मे,
के है तू अब भी मेरी सांसो मे!!



__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__



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