Friday, February 10, 2012

!! मुलाक़ात !!

मुद्दत हो गयी,
बात ना उनसे हुई,
हम तो,
कल भी यहीं थे,
आज भी,
खड़े है यहीं,
बस आस लगाएँ,
शायद आज,
उनसे रूबरू हो जाएँ,
उनसे मुहब्बत भरी,
दो-चार गुफ्तगू हो जाए!!
_© कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)_

No comments:

Post a Comment