Saturday, January 28, 2012

!! उनकी आँखो मे बस जाना चाहता हूँ !!

उनकी आँखो मे बस जाना चाहता हूँ,
उनके आँचल मे चुप जाना चाहता हूँ,

ए दिल कह दे ज़रा उस से जाकर.......
भर ले वो मुझे अपनी बाहों मे......

बाहों मे समेट उसको शुक्रिया कहना चाहता हूँ,
उसके सुर्ख अधरो का रस पीना चाहता हूँ,

ज़ुल्फो के साए तले कुछ देर जाना चाहता हूँ,
उसके आँचल मे छुप कर तोड़ा सुकून चाहता हूँ,


सितारे सी बिंदिया को निहरना चाहता हूँ,
उसकी नशेली नैनन मे डूब जाना चाहता हूँ,

मैं यूही जीवन भर उसका साथ चाहता हूँ,
अपने साथ उसको लेकर मैं, 
इस दरिया का किनारा चाहता हूँ,
बस यूही कुछ गुनगुना चाहता हूँ,

चाहत चाहत को मिला देती है,
तकदीर का खेल निराला है,
ये कहाँ से कहाँ..मिला देती है,
जब मिले कोई चाहने वाला,
ये अपने आप मिला देती है !!

__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__



!! चाहत चाहत को मिला देती है !!

चाहत चाहत को मिला देती है,
तकदीर का खेल निराला है,
ये कहाँ से कहाँ..मिला देती है,
जब मिले कोई चाहने वाला,
ये अपने आप मिला देती है !!

_कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)_

!! कौन कहता है...मोहब्बत तड़पन है !!

कौन कहता है...मोहब्बत तड़पन है,
मोहब्बत तो सुंदर अहसाशो का नाम है,
जो कहते है..मोहब्बत मे तड़पन ज़रूरी है,
कह तो उनसे जाकर...
मोहब्बत तो त्याग का दूसरा नाम है,
ऐसी मोहब्बत कर के..देखो...
अपने दिल मे सदा मोहब्बत पाओगे !!

__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__

!! हम तो प्यार बरसाते हैं !!


हम तो प्यार बरसाते हैं!
लूट सको तो लूट लो!!


मित्रो की जगह दिल मे होती है!
बाहर तो दुनिया बसा करती है!!


_कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)_

Friday, January 27, 2012

!! अपनी चाहत से तुम्हे निखारना चाहता हूँ !!

अपनी चाहत से तुम्हे निखारना चाहता हूँ,
अपनी रंगत से तुम्हे रंगना चाहता हूँ,

बादल से तोड़ा काजल ले कर,
तेरे नैनन मे भरना चाहता हूँ,

फुलो से थोड़ी खुश्बू ले कर,
तुझे महकाना चाहता हूँ,

आसमान से एक सितारा ले कर,
तुम्हारी बिंदिया बनाना चाहता हूँ,

काली घनी घटाओ को बाँध कर,
तुम्हारे ज़ूलफे बनाना चाहता हूँ,

लहराती नदी से थोड़ी लहर ले कर,
तुम्हारा आँचल लहराना चाहता हूँ,

डूबते सूरज से थोड़ी लाली ले कर,
तुम्हारे अधरो पे सुर्खी लगाना चाहता हूँ,

ऑश की नन्ही बूँद ले कर,
तुम्हारे तुम्हारे चेहरे पे टपकाना चाहता हूँ,

ठहरे हुई झील के पानी से,
तेरा आईना बनाना चाहता हूँ,

बगिया से चमेली ले कर,
तुम्हारे लिए गज़रा बनाना चाहता हूँ,

तुम्हारे लिए कुछ संगीत चाहता हूँ,
तुम्हारे लिए कुछ गुनगुनाना चाहता हूँ,

अपनी चाहत की दुनिया मे,
तुम्हे अपना बनाना चाहता हूँ !!

__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__


































Monday, January 23, 2012

!! प्यार की तलाश !!

जिस से भी मिलो,
गले लगा कर मिलो,
पता नही कब,
भगवान मिल जाए,


हम तो जिससे मिलते है,
बस प्यार से मिलते है,

प्यार की तलाश मे,
दिन रात घूमते है,
कभी भीड़ मे घूमते हैं,
कभी मेले मे घूमते हैं,

प्यार की तलाश में,
जाने कहाँ कहाँ घूमते हैं,


कोई जोगी कहता है,
कोई लुटेरा कहता हैं,
ये तो सामने वाला जानता हैं,
हम तो बस प्यार लुटाने आते हैं
जोगी बन कर चले जाते हैं...

हम तो बस,
चिरागो मे रोशिनी की लौ जलाते हैं,
इसलिए तो, इसलिए तो,
हम अपनेपन की निशानी ढूँढते हैं,

जहा मिल जाए अपनो का साथ,
वही अपना डेरा डाल लेते है,
अपने पन की रात गुज़ार लेते हैं,
प्यार की तलाश मे, दिन रात घूमते है !

__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__


Sunday, January 1, 2012

!! प्यार ही प्यार !!

मह्न्दी से सजे हाथ..
जैसे ये हाथ हमे बुला रहे हैं...
जैसे कोई अपना आवाज़ दे रहा है...
जैसे इन हाथो मे हमारा हाथ थामा है..
हम आपके पहलू मे आकर खुश हैं..


ले के चलो मुझे ऐसे जगह तुम,
हाथो मे थाम लो हाथ मेरा तुम,
हर कदम पे हो साथ, बस तुम,
नज़र आए जहा पे,बस तुम ही तुम,


तन्हाइयो से दूर, भीड़ से दूर,


अपनेपन से सजी महफ़िल हो,
जहाँ बस प्यार ही प्यार हो,
गुलाब से सजी रंगीन दुनिया हो,
फ़िज़ाओं मे फैली खुश्बू हो,
हवओ मे घुली मीठी बातें हों !


__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__