उनकी आँखो मे बस जाना चाहता हूँ,
उनके आँचल मे चुप जाना चाहता हूँ,
ए दिल कह दे ज़रा उस से जाकर.......
भर ले वो मुझे अपनी बाहों मे......
बाहों मे समेट उसको शुक्रिया कहना चाहता हूँ,
उसके सुर्ख अधरो का रस पीना चाहता हूँ,
ज़ुल्फो के साए तले कुछ देर जाना चाहता हूँ,
उसके आँचल मे छुप कर तोड़ा सुकून चाहता हूँ,
सितारे सी बिंदिया को निहरना चाहता हूँ,
उसकी नशेली नैनन मे डूब जाना चाहता हूँ,
मैं यूही जीवन भर उसका साथ चाहता हूँ,
अपने साथ उसको लेकर मैं,
उनके आँचल मे चुप जाना चाहता हूँ,
ए दिल कह दे ज़रा उस से जाकर.......
भर ले वो मुझे अपनी बाहों मे......
बाहों मे समेट उसको शुक्रिया कहना चाहता हूँ,
उसके सुर्ख अधरो का रस पीना चाहता हूँ,
ज़ुल्फो के साए तले कुछ देर जाना चाहता हूँ,
उसके आँचल मे छुप कर तोड़ा सुकून चाहता हूँ,
सितारे सी बिंदिया को निहरना चाहता हूँ,
उसकी नशेली नैनन मे डूब जाना चाहता हूँ,
मैं यूही जीवन भर उसका साथ चाहता हूँ,
अपने साथ उसको लेकर मैं,
इस दरिया का किनारा चाहता हूँ,
बस यूही कुछ गुनगुना चाहता हूँ,
चाहत चाहत को मिला देती है,
तकदीर का खेल निराला है,
ये कहाँ से कहाँ..मिला देती है,
जब मिले कोई चाहने वाला,
ये अपने आप मिला देती है !!
__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__
बस यूही कुछ गुनगुना चाहता हूँ,
चाहत चाहत को मिला देती है,
तकदीर का खेल निराला है,
ये कहाँ से कहाँ..मिला देती है,
जब मिले कोई चाहने वाला,
ये अपने आप मिला देती है !!
__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__

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