Tuesday, August 30, 2011



!! मन मोहिनी सी लगती हो आप !!



मन मोहिनी सी लगती हो आप...
 चंद्रमा की चाँदनी सी लगती हो आप...
 गुलाब सी की महक लगती हो आप....
 बरसात की बूँद लगती हो आप...
 सुबह की नन्ही ओस सी लगती हो आप...
 दिल्ली की सर्दी लगती हो आप...
 बसंत की बाहर लगती हो आप...
 रसगुल्ले का रस लगती हो आप...
 तबले की ताल लगती हो आप....
 किसी कवि की कविता लगती हो आप....
 तभी इतनी खूबसूरत सी दिखती हो आप....
दिल के करीब लगती हो आप....

(दीपक पांचाल)

!! मैं एक कवि हूँ !!

मैं एक कवि हूँ, 
अपने विचार-धारा को कलम से काग़ज़ के पन्नो पे लिखता हूँ ! 
मैं बार बार लिखता हूँ, सीधे ह्रदया पे लिखता हूँ ! 
ह्रदया पे लिखता हूँ, दिमाग़ पे लिखता हूँ ! 
एक प्रेमी के सोचने का ढंग लिखता हूँ ! 
प्रेमिका की मुस्कान लिखता हूँ ! 
मैं कभी , एक ग़रीब की सचाई लिखता हूँ ! 
तो कभी एक अमीर का दर्द लिखता हूँ ! 
मैं मुखहोटे के पीछे असली चेहरे को लिखता हूँ ! 
मैं कभी किसी मा का लाल लिखता हूँ ! 
तो कभी, किसी की बेटी के दास्तान लिखता हूँ ! 
मैं बंदूक की गोली लिखता हूँ ! 
तो कभी, किसी के सिंदूर की कीमत लिखता हूँ ! 
मैं ज़मीन लिखता हू, आसमान लिखता हूँ ! 
मैं कभी आग लिखता हूँ, तो कभी पानी की बोछर लिखता हूँ ! 
अपनी कलम से बस सचाई लिखता हूँ ! 
सोते जागते "मेरा भारत महान" लिखता हूँ ! 
_____जय हिंद_____ 
___(दीपक पांचाल___

!! एक अनदेखी, अंजानी सी सूरत !!




एक अनदेखी, अंजानी सी सूरत हरदया मे बसाए बैठा हूँ ...
कभी कविता, तो कभी ग़ज़ल उसके लिए कहता हूँ ....
तन्हाई तुम आकर बिखेर तो मेरी, मैं पलके बिछाए बैठा हूँ ....
तेरी मनमोहिनी, मदमस्त, मतवाली नैनो मैं अपनी छाया को देखता हूँ.....
एक हसरत है, पता है पूरी नही होगी, फिर भी आस लगाए बैठा हूँ.....
कहीं तुम नज़र आ जाओ चाँद मैं, इसलिए चाँदनी पे टकटकी लगाए बैठा हूँ ....
नन्ही ओस की बूँद मे आपको देखता हूँ, तो कभी गुलाब को हाथो मे लिए बैठा हूँ....
खूबसूरती जो तुमने पाई है, उसको को एक चित्र मे संजोए बैठा हूँ ....
पता है की सपने सच नही होते, रातो को जाग जाग के तेरी उम्मीद लगाए बैठा हूँ...
तुझे अपना एक नाम देना चाहता हू...इसलिए हाथ मे कलम लिए बैठा हूँ...

(दीपक पांचाल)