Thursday, November 10, 2011

!! तुझे हर वक़्त साथ अपने पता हूँ !!

तुझे हर वक़्त साथ अपने पता हूँ,

तेरी हर एक बात तो साथ लिए जाता हूँ,

तू यहीं पास है मेरे, जैसे तुझसे बातें किए जाता हूँ,

तेरे नयनो मे, बस मदहोश हुए मैं जाता हूँ !

बिखराकर का जोड़ना आता है हमे,

जब जब तेरे होटो को अपने हाथो से छूता हूँ,

सीहर सिहर तुम जाती हो,

तुम्हारी हर धकान मे,

अपने लिए एक अपनापन पता हूँ !____


__कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)__

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