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इस बरसात ने आज फिर तेरी याद दिला दी...
इस रिम झिम, ने मेरे ह्रदया मे तबले की ताल बजा दी...
इस बरसात के झरने ने, आज फिर से तेरे खूबसूरत से चहरे की याद दिला दी...
एक एक बूँद जो तेरे बदन से छू कर गिरती है..
हर एक बूँद किसी सच्चे मोती के जैसे नज़र आ रहे हैं....
तेरा भीगा बदन, किसी भीगे गुलाब के जैसा दिखता है....
कोई बूँद अगर गुलाब पे ठहर जाती है.. तो अमृत बन जाती है ...
भीगे हुए, तर्रए से, होंठ किसी गुलाब की पंखुड़ी से लगते हैं ....
कहने को तो ये बरसात है, परंतु मेरे लिए एक मनमोहक अहसास है...
एक अजीब सी सरसराहट होती है.. जब तुम अपनी मदमस्त पलके बंद करती हो...
तेरे भीगे बाल, मेरी तड़प और बढ़ा रहे हैं, दिल मतवाला हो उठा है.....
मंन मचल मचल जाता है.. तुझे छूने को दिल होता है...
तेरी हर एक अंगड़ाई पे, असमान की बिजली भी कड़क जाती है.....
जो तुझे छू कर बूँद आई है...उस हर एक बूँद को पीने का दिल करता है..
सच मे ये बरसात.. मदहोश कर देती है.. जब जब तुझे भीगते हुए देखता हूँ...
फिर से ये रिम झिम बरसात होने लगी...फिर से तेरी याद आने लगी...
___दीपक पांचाल____

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