ठंडे झरने की बौछार.....
उसके बीच बसता तुम्हारा प्यार,
यूँ जताया इतना प्यार,
हाथो मे हाथ थाम,
झरने के नीचे जाती हो,
कभी पास बुलाकर,
अनलिंगन मे ले जाती हो,
बस झरने मे भीगती जाती हो,
कितना अपनापन दे जाती हो,
भीगे मेरे सिर को,
तोलिये से पूछती जाती हो,
चाय पकोडे चटनी साथ खाकर
घर आकर.....
हमे बहुत याद दिला जाती हो!!
_कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)_
© Copy Right ║█║│█║█║█║║█║█
उसके बीच बसता तुम्हारा प्यार,
यूँ जताया इतना प्यार,
हाथो मे हाथ थाम,
झरने के नीचे जाती हो,
कभी पास बुलाकर,
अनलिंगन मे ले जाती हो,
बस झरने मे भीगती जाती हो,
कितना अपनापन दे जाती हो,
भीगे मेरे सिर को,
तोलिये से पूछती जाती हो,
चाय पकोडे चटनी साथ खाकर
घर आकर.....
हमे बहुत याद दिला जाती हो!!
_कवि दीपक दीप (दीपक पांचाल)_
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