मुख मुस्कान छाई,
अधरो पे है सुर्खी लगाई,
नैनन मे है काला कज़रा,
गैसु मे है चमेली गज़रा,
ज़ुल्फो की लटा लहराए,
आँचल तेरा उड़ता जाए,
छम छम छमा छम....
होले से तेरी पायल,
रागिनी मधुर सुनाए,
माथे सजी सितारा बिंदिया,
लचक लचकती पतली कमरिया,
मुझे हर बार है ललचाए,
तू है आकर्षण से भरी,
तू है अहसासो से भरी,
तू है मुझे तड़पाती,
मुझे क्यूँ पास बुलाती,
ना जाने क्यूँ मुझे छेड़ जाती,
अचानक से........................
फिर भाग क्यूँ जाती,
दूरखड़ी हो कर नैना मतकती,
मध्म मध्म मुस्काती जाती,
मेरी तड़पन और बढ़ाती जाती,
सुंदर चित्रण की कल्पना,
मेरे शब्दो मे तू आती जाती!!
©कवि दीपक दीप_
© Copy Right ║█║│█║█║█║║█║█║║
अधरो पे है सुर्खी लगाई,
नैनन मे है काला कज़रा,
गैसु मे है चमेली गज़रा,
ज़ुल्फो की लटा लहराए,
आँचल तेरा उड़ता जाए,
छम छम छमा छम....
होले से तेरी पायल,
रागिनी मधुर सुनाए,
माथे सजी सितारा बिंदिया,
लचक लचकती पतली कमरिया,
मुझे हर बार है ललचाए,
तू है आकर्षण से भरी,
तू है अहसासो से भरी,
तू है मुझे तड़पाती,
मुझे क्यूँ पास बुलाती,
ना जाने क्यूँ मुझे छेड़ जाती,
अचानक से........................
फिर भाग क्यूँ जाती,
दूरखड़ी हो कर नैना मतकती,
मध्म मध्म मुस्काती जाती,
मेरी तड़पन और बढ़ाती जाती,
सुंदर चित्रण की कल्पना,
मेरे शब्दो मे तू आती जाती!!
©कवि दीपक दीप_
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