Tuesday, June 5, 2012

!! सोई नही तू रात भर !!

तूने वो अहसास लिख दिया,
जैसे सोई नही तू रात भर,

कोई साथ था तेरे,
कोई पास था तेरे,

आलिंगन मे तू थी उसके,
तेरे अधरो पे अधर थे जिसके,

तेरी आँखो मे खूब नशा था,
नशे मे डूबा वो पड़ा था,

होश मे उसको आने ना दिया,
आया जब होश उसे,

फिर से पिला दी तूने........
अपने अधरो की मादक मदिरा,

रात भर तू पिलाती रही,
रात भर वो..........
घूँट पे घूँट बस भरता रहा,

वो जब जाने को था,
तुमने कुछ ऐसा कहा,



अभी ना जाओ छोड़ कर,
के दिल अभी..भरा नही!!


__©कवि दीपक दीप__


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