मन मोहिनी सी लगती हो आप...
चंद्रमा की चाँदनी सी लगती हो आप...
गुलाब सी की महक लगती हो आप....
बरसात की बूँद लगती हो आप...
सुबह की नन्ही ओस सी लगती हो आप...
दिल्ली की सर्दी लगती हो आप...
बसंत की बाहर लगती हो आप...
रसगुल्ले का रस लगती हो आप...
तबले की ताल लगती हो आप....
किसी कवि की कविता लगती हो आप....
तभी इतनी खूबसूरत सी दिखती हो आप....
दिल के करीब लगती हो आप....
(दीपक पांचाल)

Sunder abhivyakti Deepakji.......
ReplyDeleteAnju ji apna dhanyawad ....apko mere shabd ache lage....
ReplyDeleteबहुत बढ़िया लिखा है आपने,
ReplyDeleteविक्टर पब्लिक स्कूल दिल्ली वाले वेदप्रकाश पांचाल जी से मिला हूँ मैं,
विश्वकर्मा पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं...
ReplyDeleteबहुत अच्छा लगा पढ़कर ...... ब्लॉग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है.
ReplyDeleteआपका यह प्यारा सा ब्लॉग हमारे चिटठा संकलकब्लॉग ललितपर जोड़ दिया गया है.
ललित डॉट कॉम
ब्लॉग4वार्ता